- This independence day, india is celebrating the heroes of operation safed sagar
- डी बीयर्स साइटहोल्डर अंकित जेम्स ने ‘Eyora Jewels’ के साथ रिटेल सेक्टर में किया प्रवेश
- Back to Class! Prime Video Announces Seasons 2 and 3 of Fan-Favorite Adarsh Baal Vidyalaya
- इस स्वतंत्रता दिवस पर केनस्टार लेकर आया ‘नो फोन ऑवर 2.0’, पिछले साल से 3 गुना अधिक भागीदारी का लक्ष्य
- ऑपरेशन सफेद सागर की सफलता के बीच दीया मिर्ज़ा ने बताया, उनके लिए देशभक्ति के क्या मायने हैं
जानिए श्री यंत्र से होने वाले लाभ
डॉ श्रद्धा सोनी, वैदिक ज्योतिषाचार्य, रतन विशेषज्ञ

श्री यंत्र प्रमुख रूप से ऐश्वर्य तथा समृद्धि प्रदान करने वाली महाविद्या त्रिपुरसुंदरी महालक्ष्मी का सिद्ध यंत्र है। यह यंत्र सही अर्थों मे यंत्रराज है। इस यंत्र को स्थापित करने का तात्पर्य श्री को अपने संपूर्ण ऐश्वर्य के साथ आमंत्रितकरना होता है।
कहा गया है कि :-
श्री सुंदरी साधन तत्पराणाम् , भोगश्च मोक्षश्च करस्थ एव…. अर्थात जो साधक श्री यंत्र के माध्यम से त्रिपुरसुंदरी महालक्ष्मी की साधना के लिए प्रयासरत होता है, उसकेएक हाथ मे सभी प्रकार के भोग होते है, तथा दूसरे हाथ मे पूर्ण मोक्ष होता है।
आशय यह कि श्री यंत्र का साधकसमस्त प्रकार के भोगो का उपभोग करता हुआ अंत मे मोक्ष को प्राप्त होता है। इस प्रकार यह एकमात्र ऐसी साधना हैजो एक साथ भोग तथा मोक्ष दोनो ही प्रदान करती है, इसलिए प्रत्येक साधक इस साधना को प्राप्त करने के लिएसतत प्रयत्नशील रहता है।
इस अद्भुत यंत्र से अनेक लाभ है, इनमे प्रमुख है :-
♦ श्री यंत्र के स्थापन मात्र से भगवती लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
♦ कार्यस्थल पर इसका नित्य पूजन व्यापार मे विकास देता है।
♦ घर पर इसका नित्य पूजन करने से संपूर्ण दांपत्य सुख प्राप्त होता है।
♦ पूरे विधि विधान से इसका पूजन यदि प्रत्येक दीपावली की रात्रि को संपन्न कर लिया जाय तो उस घर मेसाल भर किसी प्रकार की कमी नही होती है।
♦ श्री यंत्र पर ध्यान लगाने से मानसिक क्षमता मे वृद्धि होती है।
♦ उच्च यौगिक दशा में यह सहस्रार चक्र केभेदन मे सहायक माना गया है।
♦ यह विविध वास्तु दोषों के निराकरण के लिए श्रेष्ठतम उपाय है।
विविध पदार्थों से निर्मित श्री यंत्र :
श्री यंत्र का निर्माण विविध पदार्थों से किया जा सकता है। इनमे श्रेष्ठता के क्रम मे प्रमुख है – क्र. पदार्थ विशिष्टता
1.पारद श्रीयंत्र :
पारद को शिववीर्य कहा जाता है। पारद से निर्मित यह यंत्र सबसे दुर्लभतथा प्रभावशाली होता है। यदि सौभाग्य से ऐसा पारद श्री यंत्र प्राप्त हो जाए तो रंक को भी वह राजा बनाने में सक्षम होता है।
२. स्फटिक श्रीयंत्र :
स्फटिक का बना हुआ श्री यंत्र अतिशीघ्र सफलता प्रदान करता है। इस यंत्र की निर्मलता के समान ही साधक का जीवन भी सभी प्रकार की मलिनताओं से परे हो जाता है।
३. स्वर्ण श्रीयंत्र :
स्वर्ण से निर्मित यंत्र संपूर्ण ऐश्वर्य को प्रदान करने मे सक्षम माना गया है। इस यंत्र को तिजोरी मे रखना चाहिए तथा ऐसी व्यवस्था रखनी चाहिये कि उसे कोई अन्य व्यक्ति स्पर्श न कर सके।
४. मणि श्रीयंत्र:
ये यंत्र कामना के अनुसार बनाये जाते है तथा दुर्लभ होते है।
५. रजत श्रीयंत्र :
ये यंत्र व्यावसायिक प्रतिष्ठानो की उत्तरी दीवाल पर लगाए जाने चाहिये। इनको इस प्रकार से फ्रेम मे मढवाकर लगवाना चाहिए जिससेइसको कोई सीधे स्पर्श न कर सके।
६. ताम्र श्रीयंत्र :
ताम्र र्निमित यंत्र का प्रयोग विशेष पूजन अनुष्ठान तथा हवनादि केनिमित्त किया
जाता है। इस प्रकार के यंत्र को पर्स मे रखने सेअनावश्यक खर्च मे कमी होती है तथा आय के नए माध्यमो काआभास होता है।
७. भोजपत्र श्रीयंत्र :
आजकल इस प्रकार के यंत्र दुर्लभ होते जा रहे है। इन पर निर्मित यंत्रोंका प्रयोग ताबीज के अंदर डालने के लिए किया जाता है। इस प्रकार केयंत्र सस्ते तथा प्रभावशाली होते है।
उपरोक्त पदार्थों का उपयोग यंत्र निर्माण के लिए करना श्रेष्ठ है। लकडी, कपडा या पत्थर आदि पर श्री यंत्रका निर्माण न करना श्रेष्ठ रहता है। श्री यंत्र के निर्माण के समान ही इसका पूजन भी श्रम साध्य होने के साथ साथ विशेष तेजस्विता की अपेक्षाभी रखता है। कोई भी श्रेष्ठ कार्य करने के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त का होना भी अनिवार्य होता है।


